भारत और क्रिकेट: एक लीच़ड देश का लीच़ड खेल

क्रिकेट के सबसे ज्यादा चहेते भारत में हैं ।  आखिर क्यों ना हो, यह खेल हमारी राश्ट्रीय भावनाओं के बिलकुल अनुकूल है ।

और नहिं तो क्या. जहां बाकी खेल दो या तीन घंटे में खत्म होते हैं, वहां क्रिकेट कम से कम एक दिन तो लेगा ही। वो पूरे एक दिन लाखों लोग टीवी से चिपके रहेंगे।  हर काम सुस्ति से होगा। जहां हाकि या फ़ुटबाल में एक घंटे में सांस भर आती है, वहां क्रिकेट में आप आधे दिन पैविलियन में सुस्ता सकते हैं और बाकि आधा दिन बाउन्ड्रि पे ख़डे हुए. अब हमारे बच्चे फ़िरन्गियों के बराबर दमदार ना हुए तो हम मौसम या जीन्स को दोष दे सकते हैं। दोष मड्ना तो लीचडों का पुराना फ़न है।

सबसे ज्यादा जो झुन्झलाहट पैदा करता है, वो है सहकर्मियों की हो़ड़ कि कौन ज्यादा बड़ा क्रिकेट भक्त है।  कोइ कहेगा कि उसने रात भर जागके क्रिकेट देखा तो कोइ कहेगा कि वो मैच देखने के लिए छुट्टि ले रहा है । ऐसे एक सहकर्मी के घर हम तब जा पहूंचे जब वो क्रिकेट देख रहे थे । क्रिकेट तो बीच बीच में चलता था, बाकि समय कोइ गाना या फ़िल्म । परंतु अग्ले दिन वो आफ़िस में बौयकौट के भांति भाषण देते नज़र आये ।

 भारत के औस्ट्रेलिया में एक टैस्ट मैच जीतने पर संसद ने उन्हे बधाई दी ।  एक मैच जीतना सन्सद तक पहूंच गया। जितनि उम्दा टीम, उतनि हि उम्दा हमारी अपेक्शाएं । राजस्थान सरकार ने तो एक बार किशन रूंगटा के कहने पर जयपुर में छुट्टि घोषित कर दी क्युकि जयपुर में उस दिन मैच था । क्या मज़ाक बनाया है गरीबों का और कर-दाताओं का । ऐसे कितने हि उदाहरण हैं, कहां तक गिनाएं ।  फ़िलहाल बस उम्मीद करें की कोइ क्रिकेट वार्ता आफ़िस में फ़िर से ना शुरु हो जाये !!

One Response to “भारत और क्रिकेट: एक लीच़ड देश का लीच़ड खेल”

  1. sanjay tiwari Says:

    बड़ा साफ-साफ लिखे हैं भाई. लेकिन चिंता मत करिए. अति के बाद इति ही होती है. क्रिकेट के दिन लदनेवाले हैं.

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