सिंगापुर का च्युइंग-गम कानून
च्युइंग गम शायद खाने के लिये बनी सबसे अजीब चीज़ है. स्वाद केवल दस सैकेंड आता है , फ़िर भी कभी खत्म नहिं होती. एक दोस्त के फ़लां दोस्त के फ़लां दोस्त तो सुना है कि सोते वक्त च्युइंग गम संभाल के रख देते हैं और अगले दिन चाय में डुबोके फ़िर शुरू हो जाते हैं. कितने महारथियों कि इसने शोभा बढ़ाइ है. विवियन रिचर्डस बोलर को और गम को एकसाथ चबाते थे. फ़िर क्या वजह है कि सिंगापुर ने च्युइंग-गम पर प्रतिबंध लगाया हुआ है.
ये कानून च्युइंग-गम पर ही नहिं है. सिंगापुर है ही नियमों का देश. हर छोटी से छोटी गलत हरकत आपको जेल पहूंचा सकती है.कम से कम एक अच्छा खासा शुल्क तो लगवा हि सकती है. सड़क पार करने पर, कचरा फ़ेन्कने पर, सड़क किनारे घास पर चलने पर और एसी बहुत सि चीज़ों पर जिन्हे हम भारत में अपना हक मानते हैं.बदले में आपको मिलता है एक साफ़ सुथरा शहर, करीने से चलती हुई गाड़ियां, साबुत च्मचमाती हुइ लाइटें और एक अनुशासित शहर. यह सब फ़िर भी समझ में आता है, पर च्युइंग-गम पर रोक क्यों?
वजह है M.R.T यानि सिंगापुर की मैट्रो. मैट्रो में sliding door होते हैं. और ये तभी गति पकड़ सकती है जब दोनों पल्ले स्लाइड होकर आपस में मिल जायें. कुछ सिरफ़िरे युवक इन गेट्स पर च्युइंग-गम चिपका देते थे जिससे गेट मिल ना पायें. मैट्रो को हरि बत्ति नहिं मिल पाती और बेकार का व्यवधान होता था. बात सरकार तक पहूंची. सरकार हमेशा से कहती आयी है कि युवा सिंगापुरि इन सुविधाओं की कीमत नहिं समझते, MRT तो बंद नहिं कर सकते, सो च्युइंग-गम बंद कर दी गयि. सरकार क मकसद जनता तक एक संदेश पहूंचाने क था जो पूरा हो गया. अभी सुना है कि बाहर देशों से च्युइंग-गम लाकर खाने पर प्रतिबंध हटा दिया गया है.
इन नियम कानूनों का दूसरा पक्ष भी है. यहां के लोग निर्देशों पर काम करने के आदि हो गये हैं. नयि सोच और नये विचार का अभाव है. सोचने का सारा काम
सरकार के हिस्से में है. पहले सरकार ने कभी परंपरागत उधोगों से हट्कर सोचा हि नहिं. एक बढिया मजदूर वर्ग बना पर वह अब बाकी देशों के मुकाबले महंगा हो चला है. मिसाल के तौर पर किसि भी ऐडवर्टाइसिंग कम्पनी के लिये लायक कर्मचारी ढूढना बहुत मुश्किल है. सरकार इसे समझ रहि है और प्रयास कर रहि है इस अभाव को मिटाने का.
फ़िलहाल खरीदूं “सिंगापुर अ फ़ाइन सिटि”- टी-शर्ट देख जो की मेरे भारतीय दोस्त ने मंगवायी है. (देखें चित्र)
July 3, 2007 at 12:02 pm
कर लो भई…कर लो…खरीददारी भी कर लो..!!
पर २ -४ जगह भाव देख लेना, क्योंकि मुस्तफ़ा में अमुनन कुछ सामान महंगा मिलता है.
July 3, 2007 at 2:56 pm
सही है अनुशासन लाने के लिये कानून का भय आवश्यक है.
July 8, 2007 at 3:40 pm
विजय जी, समीर जी. कमेंट्स के लिये धन्यवाद.
September 1, 2007 at 10:29 am
लहर नई है अब सागर में
रोमांच नया हर एक पहर में
पहुँचाएंगे घर घर में
दुनिया के हर गली शहर में
देना है हिन्दी को नई पहचान
जो भी पढ़े यही कहे
भारत देश महान भारत देश महान ।
NishikantWorld